आज तो दिल्ली में ही लगभग हर कालोनी में एक न एक म्च्दोनाल्ड है.. जिसमे युवौ की भीड़ लगी रहती है.. बच्चे बूढ़े सभी इस बेहद पसंद करते है.. इसके दाम भी सबके बजट में ही आ जाते है.. और साफ़ सफाई के मामले में भी यह बहुत ही अच्छा है.. तथा इसके दीवाने दिन पर दिन बड़ते जा रहे है .. और इसमें तो कई चीजे मिलने लग गयी है.. कोल्ड्रिंक,, बरगर,, MCpuf ,, ice cream ,, french fries ,, और न जाने क्या क्या मिलने लगा है.. कितने लोग यहाँ अपना जन्मदिन मनाते है दोस्तों को पार्टी देते है.... अच्छा ही हुआ की रे चुप नही बेठे और अपनी सोच को आगे बढाया नही तो MCdonald ही न होता .. मुझे तो यह सोच के ही अजीब लग रहा है अगर वो अपनी सोच पर कायम नही नोट तो क्या होता.....Tuesday, January 18, 2011
MCdonald ki masti.......
MCdonald हम सभी इस नाम से अच्छी तरह परिचित है ..जी हाँ आज कल तो यहाँ युवा पीढ़ी की भीड़ सी लगी रहती है... जिसे देखो बस MC d कहते रहते है.. अरे आखिर यह भी तोह जान लो की इसकी शुरुआत कब हुई.. कौन था वो जिसकी वजह से हम सब को MCd मिला जहाँ जा कर हम आज कल बहुत मस्ती करते है .. चलो तो अब में आपको यह बताती हूँ की आखिर इसकी शुरुआत केसे हुई.. दो भाई यानि की डिक और मैक मेक्डोनाल्ड जो की एह होटल चलते थे.... फिर उनकी मुलाकात रे क्राक व से हुई जो की एक सेलसमैन थे..फिर तीनो ने एक साथ एक होटल में काम किया ..फिर वहां वो लोगो को हेमबर्गर खिलते थे और साफ़ सफाई करते थे.. फिर एक दिन अचानक यह सब देख कर रे क्राक के मन में विचार आया की क्यों न ऐसा होटल पुरे अमेरिका में खोला जाये .. उन्होंने यह बात दोनों भाईयो को बताई पर इतना केसे होगा यह सब सोच के वो चुप रहे .. पर रे क्राक ने इस बात को उन दोनों को समझाया और 1961 MCdonald के सरे अधिकार 2 .7 मिलिओं में खरीद लिए .. फिर क्या था उन्होंने MCdonald में अपने तरीके से काम किया और पूरी अमेरिका में लोगो को इसका शौक़ीन बना दिया.. पर इन्होने हमेशा सफाई का खास ध्यान रखा .. सिर्फ 7 सालो में इन्होने अमेरिका में 1000 MCdonald खोल दिए... और धीरे धीरे यह अमेरिका से बहार निकला और कई देशो में छा गया .. भारत,, चीन ,,ऑस्ट्रेलिया और अन्य कई देशो में फ़ेल गया .. 1984 में रे क्राक की मृत्यु हो गयी पर उसके बाद भी यह चलता रहा और कई जगह फेलता चला गया ..
आज तो दिल्ली में ही लगभग हर कालोनी में एक न एक म्च्दोनाल्ड है.. जिसमे युवौ की भीड़ लगी रहती है.. बच्चे बूढ़े सभी इस बेहद पसंद करते है.. इसके दाम भी सबके बजट में ही आ जाते है.. और साफ़ सफाई के मामले में भी यह बहुत ही अच्छा है.. तथा इसके दीवाने दिन पर दिन बड़ते जा रहे है .. और इसमें तो कई चीजे मिलने लग गयी है.. कोल्ड्रिंक,, बरगर,, MCpuf ,, ice cream ,, french fries ,, और न जाने क्या क्या मिलने लगा है.. कितने लोग यहाँ अपना जन्मदिन मनाते है दोस्तों को पार्टी देते है.... अच्छा ही हुआ की रे चुप नही बेठे और अपनी सोच को आगे बढाया नही तो MCdonald ही न होता .. मुझे तो यह सोच के ही अजीब लग रहा है अगर वो अपनी सोच पर कायम नही नोट तो क्या होता.....
आज तो दिल्ली में ही लगभग हर कालोनी में एक न एक म्च्दोनाल्ड है.. जिसमे युवौ की भीड़ लगी रहती है.. बच्चे बूढ़े सभी इस बेहद पसंद करते है.. इसके दाम भी सबके बजट में ही आ जाते है.. और साफ़ सफाई के मामले में भी यह बहुत ही अच्छा है.. तथा इसके दीवाने दिन पर दिन बड़ते जा रहे है .. और इसमें तो कई चीजे मिलने लग गयी है.. कोल्ड्रिंक,, बरगर,, MCpuf ,, ice cream ,, french fries ,, और न जाने क्या क्या मिलने लगा है.. कितने लोग यहाँ अपना जन्मदिन मनाते है दोस्तों को पार्टी देते है.... अच्छा ही हुआ की रे चुप नही बेठे और अपनी सोच को आगे बढाया नही तो MCdonald ही न होता .. मुझे तो यह सोच के ही अजीब लग रहा है अगर वो अपनी सोच पर कायम नही नोट तो क्या होता.....
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment