Saturday, January 15, 2011

ठण्ड से राहत मिल गयी पर इस प्याज़ से नही..



ठण्ड ने तो अपना जलवे दिखाना बंद कर दिया........जिसके चलते कई लोगो की भी मौत हुई पर.........ना जाने प्याज़ के दामो के चाक्कर में कितने लोगो की भूक से जाने जाएगी.. गरीब लोग अपना पेट बरने के लिए कभी कभी प्याज़ से भी रोटी  खाते है ..पर अब तो उन्हें प्याज़ भी नसीब नही हो पा रही.......आखिर इस समस्या का समाधान कब निकलेगा...सरकार को गरीबो के लिए कुछ तो सोचना चाहिए .. क्या आपको पता है प्याज़ के होलसेल  रेट मात्र 15 से 25   है ..परन्तु  हमारे  पास आते आते यह इतनी महगी केसे हो जाती है..दरसल प्याज़ खेतो में से तो 15 या 20 रूपए आई .. पर गाँव से मंडी तक आते उसके रेट 25 से 30   हो जाते  है ... फिर वहां से रिलईस फ्रेश,, नेफेड ,, 6टेन,, व छोटी छोटी मंडियों में आते ही इनके दाम लगभग दुगने हो जाते है फिर इनका दाम 50 se 60 हो जाता है... और फिर बढाती है आंधादुन्ध महगाई.. और  अगर किसी कारण वश अगर  पूर्ति को रोक दिया जाए जेसा कि हाल में  लासलगाव से प्याज़ के 150 ट्रक भेजे जाते थे पर  उस वक्त  सिर्फ 10 ही ट्रक भेजे जा रहे  थे.. जिसके चलते प्याज़ के दाम आसमान पे चढ़ गये थे.. और पेट्रोल के दाम भी सी बेच बड़ा दिए गये..जिससे कि प्याज़ और महगी होना तो लाज़मी ही था.. हलकी यह सब तो मांग और पूर्ति का एक खेल था जिसे सरकार खेल रही थी..
                           
                             या यह कहिये यह तो  बस एक जरिया था लोगो को डराने का और
उनसे पैसा कमाने का.. सबने तो ठण्ड से मरने का नाम ले लिया par ना जाने कितने मासूम लोग इसी मेहगाई  के मार से मरे होंगे.. कितने दिन उन्हें खाना नही मिला होगा... और ना जाने कितने लोगो को  एक वक्त का खाना खाने के लिए ना जाने कितने पापड़ बेलने पढ़ते होगे ओया तब भी उन्हें और उनके परिवार को ठीक से खाना नही मिलता होगा.. खेर सरकार को इससे क्या वो तो बस अपनी ही धुन में है........

No comments:

Post a Comment