तथा इस बार घर को नयापन भी दिया गया है.. और कई बड़ी हस्तीया तथा कुछ अनजाने चेहरे भी है जिन्हें हर कोई नही जानता.. शुरआती समय में तो सब एक दुसरे से बहुत अच्छे से बात कर रहे है देखते है आगे क्या होता है.. इस बार सबसे अलग बात यानि महिलाओ के इस खेल में देखते है.. पिचली बार की तरह इस बार भी विजेता एक महिला ही होगी इस बात की पुष्टि तो हो ही गयी है.. Bigg boss 10.30 on colors....
dilitadka
Wednesday, October 5, 2011
big boss season 5
Monday, October 3, 2011
शारुख खान सच के सुपर हीरो
Thursday, September 8, 2011
दिल्ली के हाल बेहाल
कल सुबह सुबह दिल्ली में एक दिल दहलाने वाला हादसा हुआ .. दिल्ली high court के सामने बम विस्फोट हुआ..
फिर रात को एक बार फिर दिल्ली पर कहर बरपा और रात करीब ११.३० बजे भूकंप जो की लगभग ६.६हेक्टर की
तेज़ी से आया जिसने दिल्ली वासियों की नीदें ही उड़ा दी.. और लोग अपने अपने घरो से बहार निकल आये इस डर से कहीं वो भूकंप की चपेट में ना आ जाये.. यह तो दिल्ली है जहाँ हर पल नये हादसे घाटते रहते है..
चाहे वो कहर अतंकवादियो का हो या कुदरत का हो..या वो कहर सरकार का हो .. झेलना पढता है..
दिल्ली वासियों की परेशानी
कोई तो हल करे उनकी जिंदगानी
दिल्ली वासियों की परेशानी
कोई तो हल करे उनकी जिंदगानी
कभी आतंकियों से लगे डर
तो कभी लगे डर सरकार से
तो कभी लगे डर सरकार से
kuch
कुछ यादो से में दूर गयी हूँ
पर कुछ है जो भूल गयी हूँ
नही जानती क्या पाया है
पर खोया तो बहुत है
वो दोस्तों के साथ बीते पल
जिन्हें जीते थे हर पल
आज फिर शांति छा गयी
दोस्तों की याद आ गयी
वो साथ मै की मस्ती ..
अलग ही थी हमारी हस्ती
पर न अब वो पल रहे ..
ना ही वो कल रहे..
कुछ है जो बदल गया है..
yaad
यादो में जीने की आदत है ...
हर लम्हे से मुझे चाहत है ....
आज फिर देखा एक सपना ...
बस उसे करना है अपना ....
चाहे कितनी आये मुश्किलें ...
करना है बस उन्हें पार...
तभी मिलेगी नई मंजिले...
और होगी मेरी नईया पार.......
Sunday, April 24, 2011
Thursday, April 14, 2011
छोटा सा था सफ़र
जिसमे मिला न हमसफ़र
तड़प उठती है आज यादे
जब याद आती है बीती बातें
सोचा न था की कोई ऐसा होगा
सामने प्यार और पीछे धोखा होगा....
क्या क्या न किया सबके लिए
क्या धोखा मिले इसलिए
न आज तक किसी ने समझा मुझे
न जाना किसी ने मुझे
जब भी पीछे मुढ़ के देखा
हमेशा अपने साया ही देखा
छोटा सा था सफ़र
जिसमे मिला न कोई हमसफ़र
जब काम होता आते सब पास
जब ख़तम होता तो कहते अब बस
इस भीड़ में अकेली ही पाया खुद को
अज तक समझा न पाई खुद को...................
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