Thursday, December 2, 2010

my first poem......

प्यार में रोई भी,
प्यार में खोयी भी.
संसार से डरती हूँ,
प्यार भी करती हूँ.
                    ज़िन्दगी में चाह जिसे ,
                    उसे भी पा न पाई में.
                    प्यार की इस रह में,
                    उसे दुंद न पाई में.
बहूत प्यारा है वो,
सबसे न्यारा है वो.
गुस्सा उसका डरता,
प्यार उससे करता.
                        पल पल करती हूँ इंतज़ार
                        यादो में आता है इज़हार
                        जाने कहाँ गया वो यार
                        जिसे खोजती  में हर बार
प्यार की इस रह में
अकेली रह गयी में...............                    

5 comments:

  1. बहुत सरहनीय प्रयास है ज्योति जी, ईश्वर से कामना है आप इसी तरह आगे अच्छा लिखती रहे | जय श्री राम

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  2. acha prayas hai age bhi aise likhte rahe

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  3. बहुत ही अच्छा प्रयास है .पर गलतियाँ बहुत है .स्पेलिंग का |पर लिखते रहना ज्योति जी .कविता का विषय अच्छा है .

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  4. KAVITA ACHHI HAI.... BAHUT ACHHI......
    LEKIN JO TOPIC HAI WO KAVITA ME HI ACHHA LAGTA HAI........ TRY TO WRITE ON THE SOCIAL TOPICS...


    KASAB PAR BHI BAHUT ACHHA LIKHA HAI.... SHAYAD TERI KAVITA KO HUMARA KANUN BHI PAD LE... HO SORRY ME TO BHUL HI GAYA KI HUMARA KANUN ANDHA HAI.......
    KHER
    YOU WROTE WELL... BEST OF LUCK.
    TAKE CARE

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