Thursday, April 14, 2011

छोटा सा था सफ़र 
जिसमे मिला न हमसफ़र  
तड़प उठती है आज यादे 
जब याद आती है बीती बातें 
सोचा न था की कोई ऐसा होगा 
सामने प्यार और पीछे धोखा होगा....
 क्या क्या न किया सबके लिए
क्या धोखा  मिले इसलिए 
न आज तक किसी ने समझा मुझे
न जाना किसी ने मुझे 
जब भी पीछे मुढ़ के देखा
हमेशा अपने साया ही देखा

छोटा सा था सफ़र 
जिसमे मिला न कोई हमसफ़र 
 जब काम होता आते सब पास 
जब ख़तम होता तो कहते अब बस 
इस भीड़ में अकेली ही पाया खुद को
अज तक समझा न पाई खुद को...................

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