हिस्सा लेते हैं.. इसका आयोजन हर चार साल में एक बार होता है..
यह खेल 1930 में हेमिल्टन में शुरू हुए थे.. तब से ही यह खेले जा रहे है.. तब इन खेलो का नाम ब्रिटिश एम्पायर गेम्स था.उस समय मात्र 11 देश और 400 एथलीट ही शामिल थे..1934 से 1942 तक इन खेलो का आयोजन नही हो सका था क्युकि उस दौरान द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था.. इन खेलो के
आयोजन पर नियंत्रण का काम राष्ट्रमंडल खेल संघ संभालता है.. इसके बाद 1954 में इन खेलो का नाम ब्रिटिश एम्पायर और कॉमन वेल्थ गेम्स में बदल दिया गया.. इसी तरह 1970 में इसके नाम फिर बदला और ब्रिटिश कॉमन वेल्थ गेम्स रख दिया गया.. नाम बदलने का सिलसिला यही नही थमा एक बार फिर इसका नाम बदला गया 1978 में इसका नाम कॉमन वेल्थ गेम्स रख दिया गया और तब से लेकर आज तक यही नाम है..
महारानी की बेटन रिले
इन खेलो में एक और खास पहलु है जो कि महारानी की बेटन रिले है..यह राष्ट्रमंडल खेलों की एक महान परंपरा है..जब इन खेलो कि शुरुआत तब रिले कि जगह ब्रिटिश झंडे का प्रयोग होता था.. यह झंडा इन खेलों में ब्रिटिश प्रभुसत्ता को दर्शाता था..लेकिन 1950 के बाद रिले कि शुरुआत हो गयी थी..यह रिले लंदन के बकिंघम पैलैस से शुरू हुई थी..यह एक पारम्परा कि तरह है.. इसमें महारानी
एक सन्देश के साथ धावक( athlete) को रिले देती है..इसके बाद सभी बड़े बाबे खिलाडियों को यह बेटन दी जाती है फिर यह हर उस देश में जाती है जहाँ खेलो का आयोजन होने वाला होता है..
खेल के प्रतीक
इस बार के खेलो में 17 खेल शामिल हुए थे: तीरंदाजी, जलक्रीड़ा,, एथलेटिक्स,, बैडमिंटन,, मुक्केबाजी, साइक्लिंग्,, जिमनास्टिक्स,, हॉकी,, लॉनबॉल,, नेटबॉल,, रगबी 7 एस,, शूटिंग,, स्कैश,, टेबल टेनिस,, टेनिस,, भारोत्तोलन और कुश्ती.. इस बार के खेलो में पहली बार पेरा-खेल भी खेले गये..जो कि विकलागो के लिए थे..इसकी शुरुआत पहली बार भारत में ही हुई..


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